Godan in Hindi Pdf ||गोदान की संपूर्ण कथा हिंदी में||


Godan in Hindi Pdf 

आप सभी को bestpdf.in  का नमस्कार, स्वागत है मेरे आज के इस नए Blog में| आज मैं आपके लिए जो उपन्यास लेकर आया हूं वह हिंदी साहित्य में मील का पत्थर है|  जिसका नाम है Godan in Hindi Pdf | गोदान साहित्य की हिंदी पीडीएफ यहां से डाउनलोड कर सकते हो| यदि आप गोदान को  पढ़ना चाहते हो तो नीचे दिए हुए आर्टिकल में पढ़ भी सकते हो|

आज इस लेख में गोदान की संपूर्ण कथा छोटे रूप में बताई गई है| उसके साथ ही आपको गोदान की कहानी और पात्रों को समझाने की कोशिश करेंगे| इसलिए गोदान जैसे अमूल्य साहित्य को पढ़ने के लिए हमारे साथ अंत तक बने रहिए| चलिए अब शुरू करते हैं गोदान की कहानी के बारे में|

Godan in Hindi Pdf की जानकारी

पीडीएफ का नामGodan in Hindi Pdf 
पीडीएफ की साइज16.8 MB
डाउनलोड लिंकयहां क्लिक करें
Godan in Hindi Pdf 

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Godan क्या है?

गोदान एक हिंदी साहित्य का बहुत ही अमूल्य उपन्यास है| गोदान के रचयिता मुंशी प्रेमचंद है| मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में हिंदी साहित्य को बहुत योगदान दिया है| गोदान भी उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है|

मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं है| हिंदी साहित्य और प्रेमचंद एक दूसरे के पूरक नाम का सकते हैं| उनकी अमर कृति गोदान शीर्षक का अर्थ है – गाय का दान| इसका मतलब यह है कि अपने जीवन काल के सभी पापों से ऋण मुक्त होकर अपने आगे का सफर तय करना|

हम आपके लिए गोदान की हिंदी पीडीएफ लेकर आए हैं| इस हिंदी पीडीएफ में गोदान की पूरी कहानी और कथा को विस्तृत रूप से बताया गया है| साथ ही यह डिजिटल फॉर्मेट में होने के कारण आप इसे कहीं भी पढ़ सकते हो| गोदान की हिंदी पीडीएफ के कारण, आपको इसकी फिजिकल बुक लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी|

यदि आप गोदान की पूरी कथा को 10-15 मिनट में समझाना चाहते हो तो वह भी आप यहां समझ सकते हो| इसके लिए हमने गोदान की संपूर्ण कथा को छोटे रूप में समझाया है| छोटे रूप में गोदान को समझने के लिए हमारे साथ इस आर्टिकल में अंत तक बने रहें|

गोदान की संपूर्ण कथा हिंदी में

प्रस्तावना

आधुनिक हिंदी साहित्य के इस कालजई कथाकार के इस उपन्यास में मुख्य रूप से सामाजिक बंधनों में जकड़े हुए एक गरीब किसान होरी की कहानी है, जिसकी अपने घर में एक गाय पालने की इच्छा थी|

कहानी का परिदृश्य पराधीन भारत का है, जो भारत स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था| समाज कुरीतियों में बंधा हुआ था|गरीबों का शोषण जमींदारों और समाज के ठेकेदारों के हाथों होता था| और गरीब इसे ही अपनी नियति मानते थे|

पूंजीपति अमीर होते जा रहे थे, और गरीब और ज्यादा गरीब| महिलाओं का दमन होता था जो भी अन्य के खिलाफ आवाज उठाता था उसे बागी ठहरा दिया जाता था| और उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता था

 इस उपन्यास में कहानी कहानी एक दूसरे में बंधी हुई है|होरी की कहानी, उसके बेटे की कहानी, वहां के जमींदार राय साहब की कहानी और उनके दोस्तों की कहानी, मिस मालती, गोविंदी ऐसे अनेकों पात्र है|होरी की कथा के साथ-साथ एक और कथा मुख्य धारा में उभर कर आती है- मेहता और मालती की| यह होरी की दुनिया से बिल्कुल अलग है| तो लिए बिना और देर किए शुरू करते हैं|

Godan in Hindi Pdf  के मुख्य पात्र

सबसे पहले Godan in Hindi Pdf के कुछ मुख्य पात्र से आपका परिचय करवा देता हूं|

सबसे मुख्य पात्र यानी कहानी का नायक है होरी| एक गरीब किसान, जो नीति के विरुद्ध जाना पाप समझता है| और अपने साथ हो रहे अन्य बुरे कर्मों को भी अपनी किस्मत ही समझता है| नरम दिल का है, पर बहुत ही दबा हुआ भी है|

धनिया होरी की पत्नी, जो कि यूं तो गांव की अन्य औरतों की तरह ही घर संभालती है| और पति की मदद करती है| पर अपना अलग दिमाग रखती है| उसके लिए समाज और नीति से ज्यादा अपना परिवार प्रिय था|

इन दोनों का पुत्र गोबर, इस पत्र के कहानी के साथ-साथ कई बार रंग बदलते हैं वह आपको आगे कहानी में मालूम पड़ेगा|

सोना और रूपा धनिया की दो बेटियां , होरी के दो भाई हीरा और शोभा– जिन्हें होरी और धनिया ने ही पालन पोषण कर बड़ा किया|

पत्नी झुनिया एक और मुख्य पात्र है गोबर की संगिनी | झुनिया के पिता का नाम है भोला|

इन मुख्य पात्रों के अलावा भी काफी सारे पात्र हैं| जैसे की राय साहब, दातादिन उनका पुत्र, मातादिन|न थी चिंगर सिंह साहूकार महाजन मल्टी श्री खन्ना गोविंदा मेहता, मिर्जा खुर्शीद और रामसेवक जैसे-जैसे कहानी बताते जाऊंगा, सभी पात्रों से आपका परिचय होता जाएगा|

उपन्यास में एक ग्रामीण एक शहरी दो कथानक एक साथ चलते हैं| दोनों कहानी किसी-किसी मोड़ पर टकराती है| बस बहुत ज्यादा एक दूसरे से संबंध नहीं है|

गोदान की कहानी शुरू होती है-

लखनऊ के पास के बिलारी गांव से जहां होरीराम अपनी बीवी और तीन बच्चों के साथ रहता था| पांच बीघा जमीन थी| जिससे उसका गुजर किसी तरह चलता था| वहां के जमींदार राय साहब की चापलूसी के चलते, उनकी कृपा दृष्टि के कारण होरी का गांव भर में सम्मान था|

धनिया होरी की पत्नी इतनी दुनियादारी ना समझती थी| और जरा तीखे स्वभाव की थी| उसका मानना था की बेवजह जमींदार के तलवे क्यों चटना और इसी विषय पर अक्सर होरी और धनिया में लड़ाई होती| उनके पुत्र गोबर को भी अपने पिता का जमींदार की चापलूसी करना बिल्कुल ना सुहाता था|16 वर्ष का था| जवान खून गर्म था|

दो बेटियां सोना 12 वर्ष की और रूपा 8 वर्ष की थी| एक दिन राय साहब से मिलने जाते वक्त होरी के मुलाकात भोला अहीर से हुई| जो अपनी गाय लिए चला आ रहा था| भोला पास ही के पूर्व गांव का ग्वाला था| और दूध मक्खन का व्यवसाय करता था| और सही दाम मिल जाए तो गायों का भी| वह अपने गांव का मुखिया था|

भोले की गाय देखकर होरी की बरसों की लालसा फिर जाग गई, एक गाय खरीदने की| बातचीत में होरी ने भोले का रिश्ता तय करवाने का जिम्मा लिया| भोले की पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी| और वह फिर से विवाह करना चाहता था| होरी को भोले की कमजोर नस मिल गई थी, भोला भी होरी की बातों में आ गया| अपनी दोबारा शादी की आस में उसने वह गाय होरी को देनी चाहिए| पर जब होरी ने भोले का दुखड़ा सुना कि वह ठीक से ध्यान भी नहीं रख पा रहा है, गायों का| होरी बोला मेरे घर से भूसा ले जाओ|

भूसा पहुंचने गोबर और होरी भोले के घर तक गए| वहां गोबर की मुलाकात झुनिया, भोला की बेटी से हुई| दोनों में थोड़ी बातचीत हुई और थोड़ा विनोद हुआ| उसके बाद गोबर का गाय ले जाने का मन और भी ज्यादा होने लगा| इसी बीच होरी की पत्नी की लड़ाई उसके भाइयों के साथ हो जाती है| उसके बाद होरी और गोबर भोला के यहां से गाय लेकर जाते हैं| गाय को देखकर धनिया भी खुशी से झूम उठी| और आसपास के सभी लोग भी बहुत खुश हुए| लेकिन होरी के भाई गाय देखने नहीं आए|

हीरा को यह बात मान ही मन चुभने लगी| और उसने गाय को मारने की ठान ली| उसने गाय को एक रात कोई विषैली जड़ खिला दी और वह मर गई| यह कुकर्म करते हुए होरी ने अपने भाई को देख लिया था| सुबह जब गाय मरी हुई मिली तो होरी ने तब उसने अपना संदेह धनिया से हीरा पर डाल दिया| धनिया सुनते ही आग बबूला हो गई और उसने होली की इच्छा के विरुद्ध हीरा पर गौ हत्या का आरोप लगाया|

पुलिस आई और हीरा के घर के तलाशी लेनी चाहि| पर होरी ने इज्जत बचाने के चक्कर में अपने बेटे की झूठी सौगंध खाई और धनिया से खूब लड़ा| हीरा घर छोड़कर भाग गया| अब होरी ने हीरा की बीवी पूनिया की भी जिम्मेदारी अपने सर पर उठा ली| यहां होरी के विशाल हृदय का उदाहरण देखने को मिलता है|

होरी ने सावन में अपने धन छोड़, पनिया के धान की रोपाई कर डाली| जिसके परिणाम स्वरुप होरी की तो नाम मात्र फसल हुई और पूनिया का फसल से घर भर गया| धनिया भी अब पूनिया के प्रति कठोर ना रहे|

इधर गोबर और झुनिया का प्रेम प्रसंग गहराता जा रहा था| जिसका परिणाम यह निकला की, 5 माह की गर्भवती झुनिया को गोबर को अपने घर लाना पड़ा| वह झुनिया को घर की राह पर छोड़कर भाग गया| पहले तो धनिया और होरी झुनिया पर बहुत बिगड़े, पर फिर उन्हें उसे पर दया आ गई| और उन्होंने उसे रख लिया| गोबर चुप कर सब देख रहा था और जब आश्वस्त हुआ कि अब झुनिया को थोर मिल गया है तो वह चला गया, कुछ बनकर आने के लिए|

झुनिया को तो रहने को मिल गया, पर गांव वालों ने होरी और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया| इसी विषय को लेकर धनिया और पंडित डाटा दिन में झड़प हो गई और होरी पर पंचायत में डाटा दिन के बहकावे में दंड या जुर्माना लगाया| ₹100 और 30 मन अनाज का| होरी फिर से कर्ज लेने को मजबूर हो गया, ताकि जुर्माना भरा जा सके| उसे पर पहले ही काफी कर्ज था| अपना घर गिरवी रखना पड़ा और अनाज भी सारा दंड स्वरूप दे दिया|

वहां भोला भी होरी से काफी नाराज था, उसने झुनिया को आश्रय दे दिया था| भोले अपनी गाय की कीमत लेने आया, पैसे कहां थे, होरी के पास, तो भला उसके दोनों बैल खोल कर ले गया| बैलों बिना एक किसान अपंग हो जाता है| होरी के खुद के खेत नाजुक पाए वह और पूरा परिवार दूसरों के खेत में मजूरी करने लगा|

एक दिन डाटादिन ने होरी से सांझी खेती करने का प्रस्ताव रखा और होरी उसकी धूर्त को पहचान नहीं पाया और मान गया| गन्ना बेचकर कुछ बचा लेगा और बैल ले लेगा, फिर से ऐसा सोचा था हरी ने| पर उसके हाथ कुछ ना लगा क्योंकि देनदारी वसूली कर ले गए| अब होरी और उसका परिवार मजदूरी कर रहे थे| अपने ही खेत में और बड़ी मुश्किल से गुजर कर रहे थे, एक वक्त का खाना खाकर|

उधर गोबर साल भर लखनऊ रहने के बाद गांव लौटा| झुनिया को अपने साथ शहर में ले जाने| गोबर ने शहर में पहले तो मिर्जा खुर्शीद के यहां माली की नौकरी करी, फिर और भी काम किया और ठीक-ठाक कमाई कर ली|

होरी कामकाज के बोझ से खेत में बेहोश हो गया, धनिया व्याकुल हो गई, पर सब ठीक था| उसी समय गोबर का आना हुआ| सब बहुत प्रसन्न थे, वह पूरे परिवार के लिए तोहफा लाया था| धनिया बहुत खुश हुई| गोबर अब काफी समझदार हो चला था| गांव वालों पर उसका बड़ा रॉक पड़ा| उसने भोले के पास जाकर सभी गिले शिकवे दूर करके अपने बैलों की जोड़ी भी वापस ले लिए|

गोबर ने अपने अकड़ स्वभाव से गांव के बड़ों को नाराज कर दिया था और यह भी सुना दिया था कि वह पांचों पर दावा करेगा, जिन्होंने अनुचित जुर्माना लगाया| उसके बाद गोबर ने अपने घर पर बहुत शानदार होली का कार्यक्रम रखा| जो की बहुत सफल भी हुआ| इससे भी गांव के ठाकुर साहूकारों को बड़ी चीड़ हो गई| गोबर में नीति और कानून को लेकर काफी बहस हुई| होरी को गोबर की बातें समझ नहीं आ रही थी|

उधर मुख्याओं ने गोबर को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र रचा| होरी से वापस जुर्माना करके रुपए चुकाने को कहा गया जो कि वह पहले ही चुका चुका था| पर गोबर के आगे मुखिया हार गए| फिर गोबर ने होरी को बहुत लताड़ लगाई और धनिया को भी खरी खोटी सुनाई कि उसने ठेका नहीं लिया है इनके सारा बोझ लेने का| और उसके बाद गोबर अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर शहर चला गया| होरी का घर बिल्कुल सूना हो गया|

उधर पंडित डाटादिन के पुत्र मातादिन ने सिलिया चमारन को रखैल के रूप में रखा हुआ था| एक दिन खेत में काम करते वक्त सिलिया के मां-बाप और दोनों भाई और भी कई अन्य बिरादरी वालों ने आकर मातादिन को घेर लिया और उसके मुंह में जबरदस्ती हड्डी डालकर उसकी दुर्गत कर दी| सिलिया की मां ने उसे साथ चलने को कहा तो उसने मना कर दिया| उसे अपने परिवार वालों की करनी पर बहुत क्रोध आ रहा था| यहां डाटादिन में मातादीन को सिलिया को त्यागने को कहा ताकि उसका धर्म वापस लौटाया जा सके| मातादीन ने ऐसा ही किया, इसलिए शिलिया अब घर की रही ना घाट की| ऐसे में धनिया ने उसे अपने घर में आसरा दिया| होरी यह सब देखकर आश्चर्यचकित था|

आगे की कहानी विस्तृत रूप से पढ़ने के लिए ऊपर दी हुई Godan in Hindi Pdf  डाउनलोड कर लें|

उपन्यास गोदान के बारे में पूछे जाने वाले कुछ सवाल

1. गोदान में कुल कितने पात्र है?

गोदान में वैसे तो बहुत सारे पात्र हैं| लेकिन मुख्य पात्र होरी, जिसकी पत्नी का नाम धनिया और उसके पुत्र का नाम गोबर है| उसकी दो बेटियां हैं जिनका नाम रूप और सोना है|

2. उपन्यास गोदान का प्रमुख नायक कौन है?

मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी हुई उपन्यास गोदान का प्रमुख नायक होरी है| जो की एक गरीब किसान है|

3. उपन्यास गोदान के होरी की प्रमुख इच्छा क्या थी?

होरी की प्रमुख इच्छा एक गाय पालने की थी|

4. मुंशी प्रेमचंद ने कुल कितनी कहानियां लिखी?

मुंशी प्रेमचंद जी ने 300 से ज्यादा कहानी, 15 उपन्यास, तीन नाटक, 10 अनुवाद और साथ बाल पुस्तक भी लिखी है|

5. Godan in Hindi Pdf कैसे डाउनलोड करें?

इस आर्टिकल में ऊपर में दिए हुए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करके, गोदान को डाउनलोड कर सकते हो|

निष्कर्ष

हिंदी साहित्य के सबसे बड़े साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी ने अपने जीवन काल में ही बहुत सारी कहानी उपन्यास और नाटक लिखे हैं| लेकिन उनकी हर एक कहानी या फिर उपन्यास से हमें कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है| यदि आप गोदान की पूरी कहानी को अंत तक पढ़ेंगे तो आपको भी जिंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा| सबसे बड़ी बात यह है कि गोदान की कथा पढ़ते समय आपको बोरिंग बिल्कुल भी महसूस नहीं होगा| इसलिए आज ही आप सभी लोग गोदान की इस कहानी को पढ़ना शुरू करें|

इसके अलावा आपको यदि यह आर्टिकल अच्छा लगा तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं| साथ ही -अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना बिल्कुल भी ना भूले|


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